कोटकासिम में नशामुक्ति, सिद्ध योग ध्यान और विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, 300 विद्यार्थियों ने लिया भाग

HIGHLIGHTS
- कोटकासिम के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नशामुक्ति, सिद्ध योग ध्यान और विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया।
- करीब 300 विद्यार्थियों सहित अन्य प्रतिभागियों को नशे के दुष्प्रभावों, स्वस्थ जीवनशैली, कानूनी अधिकारों और निःशुल्क विधिक सहायता की जानकारी दी गई।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में विद्यार्थियों को नशे के दुष्प्रभावों, स्वस्थ जीवनशैली और निःशुल्क विधिक सहायता की दी जानकारी
कोटकासिम, खैरथल-तिजारा। नशामुक्त भारत अभियान और राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (रालसा), जयपुर के एक्शन प्लान के तहत कोटकासिम स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में नशामुक्ति, सिद्ध योग ध्यान साधना, कुंडलिनी जागरण एवं विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, खैरथल-तिजारा और अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में करीब 300 विद्यार्थियों सहित अन्य प्रतिभागियों ने भाग लिया।

शिविर का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को नशे के शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करना, योग और ध्यान के महत्व की जानकारी देना तथा उन्हें अपने कानूनी अधिकारों एवं नागरिक कर्तव्यों के प्रति सजग बनाना रहा। कार्यक्रम के दौरान स्वस्थ जीवनशैली अपनाने, नशे से दूर रहने और समाज में सकारात्मक संदेश पहुंचाने के लिए विद्यार्थियों को प्रेरित किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, खैरथल-तिजारा के अध्यक्ष शैलेन्द्र व्यास के निर्देशन में किया गया। इस दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अजीत कुड़ी ने विद्यार्थियों और विद्यालय स्टाफ को सिद्ध योग ध्यान का अभ्यास करवाया। उन्होंने नशे से होने वाले नुकसान, विभिन्न बीमारियों और मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों के बारे में जानकारी दी।
नशामुक्त भारत अभियान के तहत विद्यार्थियों को किया जागरूक
नशामुक्त भारत अभियान का उद्देश्य समाज में नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और लोगों को नशे से दूर रहने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए कोटकासिम के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में आयोजित शिविर में विद्यार्थियों को नशामुक्त जीवन के महत्व के बारे में बताया गया।
कार्यक्रम के दौरान समझाया गया कि नशे की आदत व्यक्ति के स्वास्थ्य, पारिवारिक जीवन, शिक्षा और सामाजिक संबंधों को प्रभावित कर सकती है। विशेष रूप से विद्यार्थियों के लिए नशे से दूर रहना और स्वस्थ आदतों को अपनाना उनके शारीरिक तथा मानसिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण है।
विद्यालय स्तर पर आयोजित जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर जानकारी देने और उन्हें जिम्मेदार जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने का माध्यम बनते हैं। ऐसे कार्यक्रमों के जरिए विद्यार्थी नशे के नुकसान को समझने के साथ अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी जागरूकता का संदेश पहुंचा सकते हैं।
शिविर में विद्यार्थियों से नशे से दूर रहने, अपनी दिनचर्या को स्वस्थ बनाए रखने और समाज में नशामुक्ति के प्रति जागरूकता बढ़ाने में सहयोग करने की अपील की गई।
सिद्ध योग ध्यान और कुंडलिनी जागरण की दी जानकारी
शिविर का एक प्रमुख हिस्सा सिद्ध योग ध्यान साधना और कुंडलिनी जागरण से संबंधित रहा। कार्यक्रम के दौरान जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव अजीत कुड़ी ने विद्यार्थियों एवं विद्यालय स्टाफ को सिद्ध योग ध्यान का अभ्यास करवाया।
इस सत्र के माध्यम से प्रतिभागियों को योग और ध्यान के अभ्यास से परिचित कराया गया। विद्यार्थियों को अपने शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने तथा जीवन में स्वस्थ आदतों को महत्व देने के लिए प्रेरित किया गया।
आज की व्यस्त दिनचर्या में विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई, नियमित गतिविधियों और व्यक्तिगत स्वास्थ्य के बीच संतुलन बनाए रखना महत्वपूर्ण है। योग और ध्यान जैसी गतिविधियां व्यक्ति को अपने शरीर और मन के प्रति जागरूक होने का अवसर देती हैं। नियमित अभ्यास को स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में सिद्ध योग ध्यान साधना और कुंडलिनी जागरण को लेकर जागरूकता के साथ विद्यार्थियों को आध्यात्मिक अभ्यास के महत्व से भी परिचित कराया गया।
शिविर का उद्देश्य विद्यार्थियों को योग और ध्यान के प्रति रुचि विकसित करने तथा स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना रहा।
नशे के सेवन से होने वाले शारीरिक और मानसिक नुकसान बताए
कार्यक्रम के दौरान अजीत कुड़ी ने नशे के सेवन से होने वाले शारीरिक एवं मानसिक दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने नशे से जुड़ी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और विभिन्न बीमारियों के प्रति प्रतिभागियों को जागरूक करते हुए नशे से दूर रहने की अपील की।
नशे की लत व्यक्ति के स्वास्थ्य के साथ उसके पारिवारिक और सामाजिक जीवन पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसके कारण पढ़ाई, कामकाज और रोजमर्रा की जिम्मेदारियों को निभाने में कठिनाइयां पैदा हो सकती हैं।
विद्यार्थी जीवन में अच्छी आदतों का विकास भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होता है। इस उम्र में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, अनुशासित दिनचर्या और नशे से दूरी बनाए रखना सकारात्मक जीवनशैली के प्रमुख पहलू हैं।
शिविर के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि स्वस्थ जीवन जीने के लिए नशे से दूर रहना और अपनी शारीरिक एवं मानसिक स्थिति के प्रति सजग रहना आवश्यक है।
कार्यक्रम के माध्यम से नशामुक्ति को केवल व्यक्तिगत विषय न मानकर सामाजिक जिम्मेदारी के रूप में देखने का संदेश भी दिया गया। जागरूक विद्यार्थी अपने परिवार, मित्रों और समाज में नशे के नुकसान के बारे में जानकारी साझा कर सकते हैं।
स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए किया प्रेरित
कोटकासिम में आयोजित इस शिविर में विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली के महत्व के बारे में भी बताया गया। कार्यक्रम के दौरान उन्हें अपने स्वास्थ्य के प्रति जिम्मेदार बनने और नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
स्वस्थ जीवनशैली में नियमित दिनचर्या, शारीरिक गतिविधि, संतुलित आहार, पर्याप्त आराम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता जैसे पहलू महत्वपूर्ण माने जाते हैं। विद्यार्थियों के लिए इन आदतों का विशेष महत्व है, क्योंकि उनका शारीरिक और मानसिक विकास निरंतर जारी रहता है।
योग और ध्यान जैसी गतिविधियों के प्रति जागरूकता विद्यार्थियों को स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर सोचने और अपनी दिनचर्या में सकारात्मक आदतें शामिल करने के लिए प्रेरित कर सकती है।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों से अपील की गई कि वे नशे से दूर रहें और नशामुक्ति के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने में सहयोग करें।
इस तरह विद्यालयों में आयोजित जागरूकता कार्यक्रम विद्यार्थियों को व्यक्तिगत स्वास्थ्य के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों को समझने का अवसर प्रदान करते हैं।
विद्यार्थियों को निःशुल्क विधिक सहायता और कानूनी अधिकारों की जानकारी
शिविर में योग और नशामुक्ति के साथ विधिक जागरूकता को भी विशेष महत्व दिया गया। विद्यार्थियों एवं अन्य प्रतिभागियों को नागरिकों के अधिकारों, कर्तव्यों और निःशुल्क विधिक सहायता से संबंधित जानकारी दी गई।
विधिक जागरूकता का उद्देश्य लोगों को कानून के प्रति सजग बनाना और उन्हें उपलब्ध कानूनी सहायता के बारे में जानकारी देना है। कानूनी अधिकारों और नागरिक कर्तव्यों की जानकारी होने से व्यक्ति विभिन्न परिस्थितियों में अपने अधिकारों तथा जिम्मेदारियों को बेहतर तरीके से समझ सकता है।
निःशुल्क विधिक सहायता पात्र व्यक्तियों को कानूनी सलाह और न्यायिक प्रक्रिया में आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने का महत्वपूर्ण माध्यम है। निर्धारित पात्रता और नियमों के अनुसार जरूरतमंद व्यक्ति संबंधित विधिक सेवा संस्थानों से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में भी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को उपलब्ध सुविधाओं, अधिकारों और कानूनी सहायता के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा।
विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को यह संदेश दिया गया कि शिक्षा के साथ कानून और सामाजिक जिम्मेदारियों की जानकारी होना भी महत्वपूर्ण है।
नागरिकों को अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक करने पर जोर
किसी भी समाज के व्यवस्थित संचालन के लिए नागरिकों का अपने अधिकारों और कर्तव्यों के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। कानूनी जागरूकता कार्यक्रम लोगों को कानून की सामान्य जानकारी देने और उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए प्रेरित करने में सहायक होते हैं।
कोटकासिम में आयोजित शिविर में विद्यार्थियों को जनकल्याणकारी योजनाओं और निःशुल्क विधिक सहायता के बारे में जानकारी देने के साथ नागरिक अधिकारों एवं कर्तव्यों के महत्व से भी अवगत कराया गया।
विद्यार्थी समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्हें प्रारंभिक स्तर से ही कानून, सामाजिक जिम्मेदारी और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिलना उपयोगी है। जागरूकता से वे अपने परिवार और आसपास के लोगों तक भी महत्वपूर्ण जानकारी पहुंचा सकते हैं।
शिविर में विधिक जागरूकता को योग, ध्यान और नशामुक्ति के साथ जोड़कर विद्यार्थियों को स्वास्थ्य तथा सामाजिक जिम्मेदारी से संबंधित विभिन्न विषयों पर जानकारी दी गई।
मानव-वन्यजीव संघर्ष योजना-2025 के तहत भी दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान मानव-वन्यजीव संघर्ष (एचडब्ल्यूसी) योजना-2025 के संबंध में भी विधिक जागरूकता से जुड़ी जानकारी दी गई। इसका उद्देश्य मानव-वन्यजीव संघर्ष से प्रभावित व्यक्तियों को न्याय तक पहुंच उपलब्ध कराने के विषय में जागरूक करना रहा।
मानव-वन्यजीव संघर्ष ऐसी परिस्थितियों को संदर्भित करता है, जिनमें मनुष्यों और वन्यजीवों के बीच संपर्क या टकराव से लोगों, उनकी आजीविका अथवा वन्यजीवों को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी घटनाओं से प्रभावित व्यक्तियों के लिए संबंधित सहायता, कानूनी अधिकारों और उपलब्ध प्रक्रियाओं की जानकारी महत्वपूर्ण हो सकती है।
विधिक जागरूकता के माध्यम से प्रभावित लोगों को यह समझने में सहायता मिल सकती है कि किसी घटना के बाद उचित जानकारी और मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए संबंधित संस्थाओं से कैसे संपर्क किया जाए।
शिविर में एचडब्ल्यूसी योजना-2025 के तहत न्याय तक पहुंच से संबंधित जानकारी शामिल किए जाने से प्रतिभागियों को इस विषय पर जागरूक करने का अवसर मिला।
योजना से संबंधित किसी विशेष पात्रता, मुआवजे की राशि या आवेदन प्रक्रिया का विवरण कार्यक्रम की उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है। इसलिए इन बिंदुओं पर विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित प्राधिकरण के आधिकारिक दिशा-निर्देश देखना आवश्यक होगा।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र की संयुक्त पहल
कोटकासिम के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में यह कार्यक्रम जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, खैरथल-तिजारा और अध्यात्म विज्ञान सत्संग केंद्र, जोधपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में नशामुक्ति, योग-ध्यान और विधिक जागरूकता को एक साथ शामिल किया गया। इससे विद्यार्थियों को स्वास्थ्य, आध्यात्मिक अभ्यास और कानूनी अधिकारों जैसे विभिन्न विषयों पर जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिला।
जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष शैलेन्द्र व्यास के निर्देशन में आयोजित इस शिविर में प्राधिकरण के सचिव अजीत कुड़ी ने प्रतिभागियों को सिद्ध योग ध्यान का अभ्यास करवाया और नशे के दुष्प्रभावों के बारे में जानकारी दी।
इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रमों में विद्यालयों की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है, क्योंकि इनके माध्यम से विद्यार्थियों तक उपयोगी जानकारी पहुंचाई जा सकती है। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक और कर्मचारी भी शामिल हुए।
प्रधानाचार्या कविता देवी सहित विद्यालय स्टाफ रहा मौजूद
शिविर में विद्यालय की प्रधानाचार्या कविता देवी सहित शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में करीब 300 विद्यार्थियों के साथ अन्य प्रतिभागियों ने भी भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को नशे से दूर रहने, योग एवं ध्यान के प्रति जागरूक होने, स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और कानूनी अधिकारों की जानकारी प्राप्त करने का संदेश दिया गया।
शिविर के अंत में प्रतिभागियों को योग एवं आध्यात्मिक साधना के माध्यम से नशामुक्त, रोगमुक्त और सशक्त समाज के निर्माण में सहयोग करने का संकल्प दिलाया गया। साथ ही राष्ट्र और विश्व को आध्यात्मिक रूप से उन्नत बनाने की दिशा में योगदान देने के लिए प्रेरित किया गया।
कोटकासिम में आयोजित यह कार्यक्रम नशामुक्ति, स्वास्थ्य जागरूकता और विधिक जानकारी जैसे विषयों को विद्यार्थियों तक पहुंचाने की पहल रहा। करीब 300 विद्यार्थियों सहित अन्य प्रतिभागियों की भागीदारी के साथ शिविर में स्वस्थ जीवनशैली, सामाजिक जिम्मेदारी और कानूनी जागरूकता के महत्व पर जोर दिया गया।
KKT TIMES | खैरथल-तिजारा और राजस्थान की प्रमुख खबरें।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.

Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.